ट्रेंड नहीं, समझदारी चुनिए — आपकी सेहत कोई प्रोडक्ट नहीं है”
“ट्रेंड नहीं, समझदारी चुनिए — आपकी सेहत कोई प्रोडक्ट नहीं है” आज भारत में एक नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है —जल्दी शरीर बनाओ, जल्दी परिणाम पाओ। सोशल मीडिया, जिम ट्रेनर और सप्लीमेंट कंपनियों ने एक ऐसी मानसिकता बना दी है कि“अगर आप प्रोटीन शेक नहीं लेते, तो आप फिट नहीं बन सकते।”लेकिन सच क्या है? कई अस्पतालों में अब ऐसे मरीज आने लगे हैं जिनकी उम्र 30–35 साल है और उनकी किडनी की कार्यक्षमता 40–60% तक कम पाई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण –बिना जरूरत के ज्यादा प्रोटीन सप्लीमेंट लेना याअत्यधिक जिम सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयडबिना डॉक्टर सलाह के हाई-प्रोटीन डाइटधीरे-धीरे यह एक Silent Health Crisis बनती जा रही है। भारत में किडनी रोग के मरीज हर साल तेजी से बढ़ रहे हैं। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में करोड़ों लोग किसी न किसी स्तर की Chronic Kidney Disease (CKD) से प्रभावित हैं, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को बहुत देर से पता चलता है। जिम का शॉर्टकट – सेहत पर भारीआज कई युवाओं की सोच बन गई है –“प्रोटीन ज्यादा = शरीर ज्यादा अच्छा।” जबकि science कहता है –ऐसा बिल्कुल नहीं है।Indian Council of Medical Research के अनुसार एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 0.66–0.83 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन की आवश्यकता होती है। यानी 60 किलो व्यक्ति को लगभग 45–50 ग्राम प्रोटीन ही पर्याप्त है। और यह मात्रा सामान्य भारतीय भोजन से आसानी से मिल जाती है:🔅दाल🔅दूध / दही🔅घर का बना हुआ पनीर🔅चना / मूंग🔅मेवे ( dry fruits)🔅रोटी / अनाज इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि संतुलित भोजन करने वाले लोगों को नियमित प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती। ज्यादा प्रोटीन लेने से क्या हो सकता है?जब शरीर की जरूरत से अधिक प्रोटीन लिया जाता है, तो उसका मेटाबोलिज्म किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक अत्यधिक प्रोटीन लेने से संभावित समस्याएँ: कम हो जाते हैं, जिससे शरीर में अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। सबसे बड़ी समस्या – देर से पता चलना किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग ध्यान नहीं देते।ध्यान देने योग्य संकेत🔅बार-बार पेशाब आना🔅पेशाब में झाग🔅पैरों या चेहरे पर सूजन🔅अत्यधिक थकान🔅भूख कम लगना🔅पीठ के निचले हिस्से में दर्द जब ये लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब तक कई बार किडनी काफी नुकसान झेल चुकी होती है। भारत की वास्तविकताभारत में एक बड़ा विरोधाभास हैएक ओरकई लोग प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं दूसरी ओरकुछ लोग बिना जरूरत के अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट ले रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि 1.6 g/kg से अधिक प्रोटीन लेने से सामान्य लोगों में अतिरिक्त मांसपेशी लाभ नहीं मिलता। अधिक प्रोटीन = अधिक फायदायह एक मार्केटिंग मिथक भी हो सकता है। क्या भारतीयों को प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत है?ज्यादातर मामलों में नहीं। अगर आपकी डाइट में ये चीजें हैं:🔅दाल🔅दूध / दही🔅पनीर (घर पर बनाया हुआ )🔅अंकुरित अनाज🔅मूंगफली / बादाम तो आपको पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है।सप्लीमेंट की जरूरत केवल कुछ परिस्थितियों में हो सकती है:▫️गंभीर कुपोषण▫️पेशेवर एथलीट गंभीर बीमारी से रिकवरीऔर वह भी डॉक्टर या न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह से।स्वास्थ्य के लिए सही रास्ताशरीर बनाने का असली फॉर्मूला बहुत सरल है: ✔ संतुलित भारतीय भोजन✔ नियमित व्यायाम✔ पर्याप्त नींद✔ कम प्रोसेस्ड फूड✔ नियमित हेल्थ चेक-अपकोई भी पाउडर, शेक या कैप्सूल स्वास्थ्य का शॉर्टकट नहीं है।याद रखिए आज का सबसे बड़ा भ्रम है —“Health is a product.”लेकिन सच यह है कि Health is a lifestyle.आपकी सेहत किसी कंपनी का प्रोडक्ट नहीं है।यह आपकी जिम्मेदारी है। ट्रेंड के पीछे मत भागिए।समझदारी के साथ जीना सीखिए। आपकी सेहत अनमोल है।इसे विज्ञापन नहीं, विवेक से बचाइए। आपकी सेहत – आपकी जिम्मेदारी।स्वस्थ रहें, मस्त रहें। 🌿 — Dr Neha Gupta







