Author name: neha13.nutritionist@gmail.com

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🚭 “नशा छोड़ना मुश्किल है…लेकिन क्या अपने परिवार को टूटते देखना आसान है?”

सच्चाई सुनिए… शराब, cigarette, vape, ganja, gutka, afeem —ये “stress relief” नहीं हैं।ये धीरे-धीरे शरीर, दिमाग, पैसा, रिश्ते और आत्मविश्वास को खत्म करने वाली आदतें हैं। आज भारत में नशे का market इतना बड़ा है कि करोड़ों लोग unknowingly addiction के जाल में फँस चुके हैं।क्यों? क्योंकि हमने western trend को lifestyle समझ लिया…और health को पीछे छोड़ दिया। लेकिन सबसे बड़ी सच्चाई क्या है? जब आप नशा छोड़ते हैं… शरीर आपको डराता है, सज़ा नहीं देता। कुछ दिनों तक हो सकता है:⚠️ चिड़चिड़ापन⚠️ बेचैनी⚠️ गुस्सा⚠️ नींद कम आना⚠️ बार-बार craving पर ध्यान रखिए —ये बीमारी नहीं… शरीर की healing process है। Latest studies बताती हैं कि smoking/alcohol छोड़ने के बाद शरीर खुद repair mode में जाना शुरू करता है — lungs, heart, sleep, energy और mental clarity धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है। नशा छोड़ने के Powerful Natural Ways 🌿 ✅ 21 दिन गलत company से दूरी✅ सुबह walk + deep breathing✅ craving आए तो पानी, सौंफ, chewing विकल्प✅ trigger लोगों/जगहों से बचें✅ family support लें — अकेले मत लड़िए सबसे बड़ा सवाल… आपका बच्चा अगर कल वही नशा शुरू करे जो आज आप कर रहे हैं… क्या आपको अच्छा लगेगा? अगर जवाब “नहीं” है…तो याद रखिए — “नशा छोड़ना एक दिन का फैसला नहीं…खुद को वापस पाने की शुरुआत है।” ❤️ डॉ. नेहा गुप्ता

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शायद आपका पेट खराब नहीं है… शायद आपकी आदतें थक गई हैं।

आज सोशल मीडिया पर ‘Gut Health’ सबसे ज़्यादा बिकने वाला हेल्थ ट्रेंड बन चुका है। लेकिन जितनी तेज़ी से Gut के नाम पर products बिक रहे हैं, उतनी ही तेज़ी से लोग एक सच्चाई भूल रहे हैं— स्वस्थ Gut किसी capsule से नहीं, बल्कि रोज़ की छोटी-छोटी आदतों से बनता है। आइए समझते हैं कि Gut Health वास्तव में क्या है, क्यों ज़रूरी है, और बिना अनावश्यक supplements के इसे कैसे बेहतर रखा जा सकता है। लेकिन एक सवाल पूछिए— अगर gut health इतनी ही नई खोज है…तो हमारे घरों में पीढ़ियों से दही, छाछ, सादा खाना और समय पर भोजन क्यों था? शायद हम नई समस्या नहीं जी रहे। शायद हम पुरानी समझ भूल रहे हैं। Gut Health आखिर है क्या? Gut सिर्फ खाना पचाने की जगह नहीं है। यह वह जगह है जहाँ आपका शरीर रोज़ निर्णय लेता है— क्या absorb करना है।क्या बाहर निकालना है।कब भूख लगानी है।कब आराम माँगना है। इसीलिए gut का असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं दिखता। कई लोगों को इसके संकेत ऐसे महसूस होते हैं— लेकिन हर symptom का मतलब “gut damage” नहीं होता। एक असुविधाजनक सच कई बार हम gut खराब नहीं करते। हम उसे रोज़ confuse करते हैं। सुबह चाय।दोपहर जल्दी खाना।शाम processed snacks।रात स्क्रीन के साथ dinner। और फिर उम्मीद— “कोई एक supplement सब ठीक कर देगा।” क्या रोज़ दही, छाछ और fermented foods लेना सुरक्षित है? ज्यादातर स्वस्थ लोगों के लिए— हाँ, संतुलित मात्रा में और अपनी सहनशीलता के अनुसार। दही और छाछ भारतीय भोजन संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात है— सिर्फ fermented लिखा होने से कोई चीज़ healthy नहीं हो जाती। ✔️ घर का सादा दही✔️ बिना बहुत ज्यादा चीनी✔️ मात्रा का ध्यान✔️ शरीर की प्रतिक्रिया देखें कुछ लोगों को शुरुआत में bloating या discomfort भी महसूस हो सकता है। स्वास्थ्य में “एक नियम सबके लिए” कम काम करता है। Gut को नुकसान पहुँचाने वाली आदतें (जो विज्ञापन कम बताते हैं) Gut Healthy रखने के 7 सरल तरीके ✓ हर दिन कुछ प्राकृतिक भोजन शामिल करें✓ सप्ताहभर में भोजन में विविधता रखें✓ धीरे खाएँ, अच्छी तरह चबाएँ✓ पर्याप्त पानी लें✓ हल्की daily movement रखें✓ नींद को priority दें✓ हर trend को follow न करें और सबसे महत्वपूर्ण— खाने को reward या punishment बनाना बंद करें। Cure नहीं… Care Gut health कोई 7 दिन का challenge नहीं। यह शरीर के साथ रोज़ का रिश्ता है। हो सकता है आपको detox नहीं चाहिए। हो सकता है आपको सिर्फ— थोड़ा धीमा खाना,थोड़ा कम distraction,और थोड़ा ज्यादा भरोसा अपने शरीर पर चाहिए। क्योंकि— अच्छा स्वास्थ्य हमेशा महँगा नहीं होता।लेकिन उसे नजरअंदाज करना अक्सर महँगा पड़ता है। — Dr. Neha GuptaAdv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)www.drnehagupta.uk

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डॉक्टर की सबसे बड़ी सलाह दवा नहीं… आपकी रोज़ की डाइट है।

डॉक्टर की सबसे बड़ी सलाह दवा नहीं… आपकी रोज़ की डाइट है। क्या आपने कभी सोचा है… अगर आपका डॉक्टर आपको जीवनभर के लिए सिर्फ़ एक सलाह दे सकता, तो वह क्या होती? नई दवा❓ महंगा टेस्ट❓ या कोई चमत्कारी सप्लीमेंट❓ शायद नहीं। वह कहता—”अपनी डाइट बदल लीजिए, आपकी ज़िंदगी बदलने लगेगी।” यही वह सच्चाई है जिसे हम अक्सर तब समझते हैं, जब बीमारी हमारे दरवाज़े पर दस्तक दे चुकी होती है। Doctors’ Day पर मेरी आपसे एक ही विनती है— बीमारी आने का इंतज़ार मत कीजिए। सेहत को रोज़ चुनिए। हर दिन रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ, मौसमी फल, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। प्रकृति के जितना करीब भोजन होगा, शरीर उतना ही आपका साथ देगा। ─── ऐसा भोजन चुनिए जिसे आपकी दादी भी पहचान लें। Real Food कभी Trend नहीं बनता… क्योंकि वह हमेशा सही रहता है। ─── ये केवल पोषक तत्व नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर की मजबूत नींव हैं। ऊर्जा दवा से नहीं, सही पोषण से बनती है। ─── जो Diet 15 दिन चले, वह योजना है। जो 15 साल चले, वही Lifestyle है। ─── नियमित Exercise, संतुलित Diet, पर्याप्त नींद और समय-समय पर Health Check-up—यही भविष्य की सबसे समझदार तैयारी है। बीमारी का इलाज समझदारी है… लेकिन बीमारी को रोकना उससे भी बड़ी समझदारी है। एक डॉक्टर होने के नाते मेरी सबसे बड़ी खुशी तब नहीं होती जब किसी मरीज को मेडिसिन के लिए रेफर करना पड़े… बल्कि तब होती है जब सही खान-पान और अच्छी आदतों की वजह से दवाई की ज़रूरत कम पड़ जाए । याद रखिए— आपकी रसोई आपका पहला Health Clinic है। आपकी रोज़ की Plate आपकी पहली Prescription है। और… आज की सही आदतें ही कल की स्वस्थ ज़िंदगी लिखती हैं। इस Doctors’ Day, अपने डॉक्टर को शुभकामनाएँ देने के साथ एक वादा खुद से भी कीजिए— “मैं अपनी Diet को अपनी सबसे बड़ी मेडिसिन बनाऊँगा/ बनाऊँगी, न कि बीमारी आने का इंतज़ार करूँगा/करूंगी ।” – Dr. Neha GuptaAdv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (2023)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026) | INDIA’S INSPIRING DOCTORS AWARD (2026) … “Health is created in daily choices.” www.drnehagupta.uk

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​मिठास की चाहत अक्सर सिर्फ भूख नहीं, बल्कि हमारे मन की एक गहरी पुकार होती है। जब हम तनाव में होते हैं या थके होते हैं, तो हमारा दिमाग ‘Comfort’ ढूंढता है और चीनी उस कमी को तुरंत पूरा करने का सबसे आसान जरिया बन जाती है।

​मिठास की चाहत अक्सर सिर्फ भूख नहीं, बल्कि हमारे मन की एक गहरी पुकार होती है। जब हम तनाव में होते हैं या थके होते हैं, तो हमारा दिमाग ‘Comfort’ ढूंढता है और चीनी उस कमी को तुरंत पूरा करने का सबसे आसान जरिया बन जाती है। ” चीनी की तलब (Sugar Cravings): क्यों हमारा मन मीठे का गुलाम बन जाता है ? “ ​क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि दोपहर के खाने के बाद या देर रात अचानक कुछ मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है? आप अकेले नहीं हैं। भारत में, जहाँ हर खुशी का मतलब ‘मुँह मीठा करना’ है, वहाँ चीनी के साथ हमारा रिश्ता भावनात्मक अधिक है। ​अब बात करते है क्रेविंग्स के मुख्य कारण की : ​अब हम बात करेंगे 13 असरदार तरीकों की जो Sugar Cravings को मात देने में मदद करेंगे :​1. सुबह के नाश्ते में पनीर, अंडे या दालें शामिल करें। प्रोटीन भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन ‘घ्रेलिन’ को कम करता है।​2. होटलों में मिलने वाली मिश्री के बजाय सिर्फ सौंफ चबाएं। इसकी प्राकृतिक मिठास और खुशबू दिमाग को तृप्त करती है।​3. अक्सर प्यास को हमारा दिमाग भूख या क्रेविंग समझ लेता है। जब भी मीठे का मन करे, एक गिलास गुनगुना पानी पिएं।​4. सफेद चीनी के बजाय एक छोटा टुकड़ा गुड़ या 1-2 खजूर खाएं। इसमें फाइबर और मिनरल्स होते हैं जो शुगर स्पाइक को रोकते हैं (Natural Alternatives)।​5.दालचीनी ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करती है। अपनी चाय या दही में एक चुटकी दालचीनी पाउडर मिलाएं।​6. क्रेविंग आमतौर पर 10-15 मिनट तक रहती है। इस दौरान कोई फोन कॉल करें, वॉक पर जाएं या कोई छोटा काम निपटाएं।​7. नींद पूरी न होने पर ‘लेप्टिन’ (पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन) कम हो जाता है। 7-8 घंटे की नींद मीठे की इच्छा को 50% तक कम कर सकती है।​8. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों (Gut) के उन बैक्टीरिया को कम करते हैं जो चीनी की मांग करते हैं।​9.यह एक मनोवैज्ञानिक ट्रिक है। मिंट का स्वाद मुँह में होने पर कुछ भी मीठा खाने का मन नहीं करता।​10. बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज खाएं। ये न केवल आपको एनर्जी देंगे बल्कि मैग्नीशियम की कमी भी पूरी करेंगे।​11.पूछें— “क्या मुझे वाकई भूख लगी है या मैं बोर/दुखी हूँ?” जागरूक होना ही बदलाव की पहली सीढ़ी है।​12. लंबे समय तक भूखे रहने से शुगर लेवल गिर जाता है। हर 3-4 घंटे में कुछ स्वस्थ खाएं।​13. एकदम बंद करने से क्रेविंग और बढ़ेगी। धीरे-धीरे मात्रा कम करें ताकि आपका ‘Taste Buds’ एडजस्ट हो सके।​​चीनी छोड़ना कोई सजा नहीं, बल्कि अपने शरीर के प्रति सम्मान है। जब आप अपनी आंतों और मन को सही न्यूट्रीशन देते हैं, तो यह मिठास की गुलामी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।​क्या आप आज से ‘दालचीनी वाली चाय’ या ‘सौंफ’ का नुस्खा आजमाएंगे? मुझे कमेंट्स में बताएं कि आपकी सबसे बड़ी क्रेविंग कब होती है ! — Dr Neha Gupta

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सैलून में हेयर वॉश कराते समय हम एक चीज़ पर ध्यान ही नहीं देते… और डॉक्टर उसी को लेकर सावधान करते हैं

सैलून में हेयर वॉश कराते समय हम एक चीज़ पर ध्यान ही नहीं देते… और डॉक्टर उसी को लेकर सावधान करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हेयर वॉश के दौरान आपकी गर्दन किस कीमत पर रिलैक्स कर रही है?कुछ सेकंड के लिए आँखें बंद कीजिए। आप सैलून में बैठे हैं।🧖गर्म पानी… हल्का मसाज… गर्दन पीछे झुकी हुई…सब सामान्य लगता है।🛀लेकिन डॉक्टर एक दुर्लभ स्थिति के बारे में चेतावनी देते हैं — Beauty Parlour Stroke Syndrome।नाम सुनकर अजीब लगता है।लेकिन संदेश बहुत सीधा है— हर आराम सुरक्षित नहीं होता।कुछ मामलों में लंबे समय तक गर्दन को बहुत पीछे झुकाकर हेयर वॉश करने से गर्दन की महत्वपूर्ण blood veins पर दबाव पड़ सकता है, जिससे ब्रेन तक blood flow प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है — खासकर उन लोगों में जिनमें पहले से रिस्क मौजूद हो।रुकिए। इसका मतलब ये नहीं कि सैलून जाना खतरनाक है।मतलब सिर्फ इतना है—जागरूकता भी सेल्फ-केयर का हिस्सा है। किन लोगों को ज्यादा ध्यान देना चाहिए? हेयर वॉश के बाद ये लक्षण सामान्य नहीं माने जाते मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह स्थिति बहुत दुर्लभ है, लेकिन एक चीज़ लगातार सामने आई—जोखिम कम करने का सबसे आसान तरीका है — गर्दन को लंबे समय तक अत्यधिक पीछे न रखना और सही सपोर्ट लेना। बचाव के 5 छोटे नियम — जिन्हें अगली बार सैलून में जरूर अपनाइए✓ गर्दन के नीचे सपोर्ट मांगिए✓ असुविधा होते ही तुरंत बताइए✓ बहुत देर तक एक ही पोज़िशन में न रहें✓ हेल्थ रिस्क हो तो पहले से बताएं✓ जरूरत हो तो वैकल्पिक वॉश पोज़िशन चुनें एक बात याद रखिए—हम बाल कटवाने से पहले फोटो दिखाते हैं…लेकिन अपनी सुविधा बताने में झिझक जाते हैं। अगली बार सैलून जाएँ—सिर्फ अच्छा दिखने के लिए नहीं, अच्छा महसूस करते हुए लौटने के लिए जाएँ। और यह Blog उस व्यक्ति तक ज़रूर पहुँचाइए—जो हर महीने सैलून जाता है…लेकिन कभी अपनी गर्दन के बारे में नहीं सोचता। डॉ. नेहा गुप्ताAdv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (2023)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026) विशेष फीचरः ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (फरवरी 2026 संस्करण) – कवर पेज और विशेष लेख।MBA (APR) www.drnehagupta.uk

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डायबिटीज़ में पैर अचानक नहीं कटते…

डायबिटीज़ में पैर अचानक नहीं कटते… वे पहले हमारी रोज़ की छोटी-छोटी लापरवाहियों से हारते हैं। अगर आपको Diabetes है, तो यह लेख पढ़ने में सिर्फ 4 मिनट लगेंगे… लेकिन इसे न पढ़ने की कीमत शायद आपकी पूरी ज़िंदगी चुका सकती है। क्यों? क्योंकि Diabetes में सबसे खतरनाक घाव वह नहीं होता जो दिखाई देता है…बल्कि वह होता है जो दर्द ही नहीं करता। यही कारण है कि भारत में अनेक मरीज डॉक्टर के पास तब पहुँचते हैं, जब संक्रमण काफी बढ़ चुका होता है और इलाज अधिक कठिन हो जाता है।आज रात सोने से पहले सिर्फ 60 सेकंड अपने पैरों को देखिए।हो सकता है… यही 60 सेकंड आपको भविष्य में महीनों के इलाज, ऑपरेशन और चलने-फिरने की परेशानी से बचा दें। आइए जानते हैं—बारिश के मौसम में भारतीय Diabetes Patients अधिक जोखिम में क्यों होते हैं और अपने पैरों को सुरक्षित रखने के लिए रोज़ कौन-सी आसान आदतें अपनानी चाहिए। ───❓क्या आप जानते हैं?Diabetes में दर्द न होना भी खतरे का संकेत हो सकता है।लगातार बढ़ी हुई ब्लड शुगर नसों (Neuropathy) को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कई मरीजों को चोट या घाव का दर्द कम महसूस होता है, जबकि अंदर संक्रमण बढ़ता रहता है।यही स्थिति आगे चलकर Diabetic Foot का कारण बन सकती है।───Diabetic Foot क्या है?जब Diabetes के कारण पैर में— ───भारतीय मरीज अधिक क्यों प्रभावित होते हैं?समस्या केवल Diabetes नहीं…हमारी रोज़ की आदतें भी हैं।आज भी बहुत से लोग—❌ दर्द न होने पर डॉक्टर के पास नहीं जाते।❌ घर में नंगे पैर चलते हैं।❌ पतली चप्पल पहनते हैं।❌ छाले या घाव पर घरेलू उपचार करते रहते हैं।❌ डॉक्टर से तब मिलते हैं, जब संक्रमण काफी बढ़ चुका होता है। याद रखिए… बीमारी जितनी खतरनाक नहीं होती… कई बार उससे ज़्यादा खतरनाक हमारी लापरवाही होती है। ─── बारिश में खतरा क्यों बढ़ जाता है?बारिश का मौसम सिर्फ ठंडक नहीं लाता… यह साथ लाता है— 💧 लगातार नमी🦠 फंगल संक्रमण🧫 बैक्टीरिया यदि पैर लंबे समय तक गीले रहें, तो छोटी-सी दरार भी संक्रमण का रास्ता बन सकती है।और यदि शुगर नियंत्रित न हो…तो वही छोटा घाव भरने में कई सप्ताह या महीनों का समय ले सकता है। ─── 👟 क्या आपका Footwear आपके पैर बचा सकता है? हाँ, बिल्कुल। गलत चप्पल कई बार घाव की शुरुआत बन जाती है।अच्छे Footwear में होना चाहिए— ✔ सही फिटिंग✔ मुलायम कुशन✔ आगे से बंद (Closed Toe) डिज़ाइन✔ फिसलन-रोधी सोल✔ रोज़ पहनने से पहले जूते के अंदर कंकड़ या नुकीली वस्तु अवश्य देखें। ─── बारिश में पैरों की सुरक्षा के 7 Golden Rules ✅ रोज़ रात को दोनों पैरों का निरीक्षण करें।✅ पैर धोने के बाद उंगलियों के बीच अच्छी तरह सुखाएँ।✅ गीले मोज़े तुरंत बदलें।✅ घर में भी नंगे पैर न चलें।✅ किसी भी छाले या घाव को नज़रअंदाज़ न करें।✅ ब्लड शुगर को यथासंभव नियंत्रित रखें।✅ लालपन, सूजन, पस, बदबू या त्वचा का रंग बदलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। ─── 🥗 डाइट में क्या शामिल करें? पैरों की सुरक्षा सिर्फ दवा से नहीं…अच्छे पोषण से भी होती है।अपने भोजन में शामिल करें— 🥬 हरी पत्तेदार सब्जियाँ🫘 दालें और अन्य प्रोटीन स्रोत🥛 दही या अन्य उपयुक्त प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ🥜 सीमित मात्रा में मेवे और बीज🍊 विटामिन C युक्त फल (व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार)💧 पर्याप्त पानी संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन और नियंत्रित ब्लड शुगर घाव भरने और संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। ─── 📌 याद रखिए… Diabetes में पैर एक दिन में नहीं बिगड़ते… वे हर दिन हमारी छोटी-छोटी अनदेखियों से थोड़ा-थोड़ा हारते हैं।आज अपने पैरों को सिर्फ 60 सेकंड दीजिए। क्योंकि कई बार यही एक मिनट आपकी पूरी ज़िंदगी बदल सकता है। Diabetes में सबसे महँगा इलाज ऑपरेशन नहीं होता… बल्कि वह लापरवाही होती है, जिसे हम समय रहते गंभीरता से नहीं लेते। आज अपने पैरों को देखिए।क्योंकि स्वस्थ कदम ही स्वस्थ भविष्य की शुरुआत हैं। डॉ. नेहा गुप्ताAdv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (2023)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026) विशेष फीचरः ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (फरवरी 2026 संस्करण) – कवर पेज और विशेष लेख।MBA (APR) www.drnehagupta.uk

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क्या आप जानते हैं कि भारत में हर 10 में से 4 कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है?

​”क्या आप जानते हैं कि भारत में हर 10 में से 4 कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है?” कैंसर अब केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि एक आधुनिक महामारी बनता जा रहा है। भारत में इसके मामले जिस रफ़्तार से बढ़ रहे हैं, यह चौंकाने वाला है। ICMR (Indian Council of Medical Research) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2025-26 तक कैंसर के मामलों की संख्या 15.7 लाख सालाना तक पहुँचने का अनुमान है।​लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम अनजाने में अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी में ऐसी कौन सी गलतियां कर रहे हैं जो हमें इस जानलेवा बीमारी की ओर धकेल रही हैं? आइए आज सिर्फ जानते नहीं हैं, बल्कि उन कड़वे सच का सामना करते हैं जो हमारी थाली और हमारी लाइफस्टाइल में छिपे हैं। ​4 बड़ी गलतियां जो एक आम भारतीय आज कर रहा है ​अ) आज के दौर में हम ताज़ा खाने से दूर और ‘पैकेट’ वाले खाने के करीब जा रहे हैं। आज लोगों को पैकेट खोलना और खाना ज्यादा सरल लगता है, WHO के अनुसार, प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ इन्फ्लेमेशन बढ़ाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के पनपने का मुख्य कारण है। ​ब) क्या आप जानते हैं कि “Sitting is the new smoking”? घंटों एक जगह बैठकर काम करना और फिजिकल एक्टिविटी का शून्य होना भारत में बढ़ते ब्रेस्ट और कोलन कैंसर का एक बड़ा कारण है। ​स) गर्म चाय को पेपर ग्लास / प्लास्टिक के कप में पीना या प्लास्टिक के डिब्बों में खाना माइक्रोवेव करना—ये हमारी सबसे बड़ी भूल है। इसमें मौजूद BPA (Bisphenol A) सीधे हमारे हॉर्मोन्स को बिगाड़ता है।​द) नींद सिर्फ थकान मिटाने के लिए नहीं होती, यह शरीर की ‘रिपेयरिंग’ का समय है। जब हम पर्याप्त नहीं सोते, तो शरीर की इम्यून कोशिकाएं कैंसर सेल्स से लड़ने की क्षमता खो देती हैं। WHO की ताज़ा रिपोर्ट (फरवरी 2026) के अनुसार, भारत में 10 में से 4 कैंसर के मामले रोके जा सकते हैं (Preventable)। यानी 40% मामलों का कारण हमारी खराब आदतें हैं। ​. हम अक्सर कहते हैं— “हाँ, मुझे पता है कि टहलना अच्छा है।” लेकिन सच तो यह है कि ज्ञान से कैंसर या कोई भी बीमारी नहीं रुकती, क्रिया (Action) से रुकती है। ​आज से ही ये 3 बदलाव करें: ​याद रखिए, आपका शरीर वह एकमात्र घर है जिसमें आपको जीवन भर रहना है। इसकी मरम्मत आज से ही शुरू करें। — Dr Neha Gupta

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DETOX नहीं… हमने अपने शरीर पर भरोसा खो दिया है।

एक समय था जब लोग सेहत को आदतों से जोड़ते थे।आज धीरे-धीरे सेहत को पैकेट, पाउडर और प्रोग्राम से जोड़ दिया गया है। सुबह उठते ही डर शुरू—🌤️“Body toxic हो गई है…”“Detox नहीं किया तो नुकसान होगा…”“Special cleansing की जरूरत है…” 🌬️ और यहीं से शुरू होता है एक ऐसा बाजार— जहाँ कई बार पहले असुरक्षा पैदा होती है, फिर उसका समाधान बेचा जाता है।धीरे-धीरे हमने अपने शरीर को समझना कम कर दिया और बाहरी दावों पर ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया। थोड़ी थकान हुई — Detox त्योहार में ज्यादा खा लिया — Detox कुछ दिन routine खराब रहा — Detox लेकिन शायद सवाल Detox का नहीं, विश्वास का है।हम उस शरीर पर शक करने लगे हैं जो जन्म से लेकर आज तक हर दिन बिना शोर किए काम कर रहा है। हाँ, शरीर को सहयोग चाहिए—अच्छा भोजन।🥗पर्याप्त पानी।🥛नींद।😴गतिविधि।🏃🚴संतुलन। 🏂 लेकिन हर असुविधा का समाधान किसी bottle या packet में नहीं होता। कई बार हम हजारों रुपये 💵 खर्च करके वही तलाश रहे होते हैं जिसकी शुरुआत हमारी थाली, रसोई और दिनचर्या से हो सकती है। सबसे बड़ी गलती यह नहीं कि लोग products 🛍️खरीद रहे हैं।सबसे बड़ी गलती तब होती है जब लोग अपनी सेहत की जिम्मेदारी पूरी तरह बाहर (Market) सौंप देते हैं। याद रखिए—🥗 सेहत कोई 7 दिन का challenge नहीं। 🪄 कोई जादुई shortcut नहीं। 💎 सेहत रोज़ लिए गए छोटे फैसलों का परिणाम है। 🐦‍🔥 अपने शरीर को दुश्मन मत समझिए। उसे सुनिए।उसे समय दीजिए। और उससे पहले कि कोई market आपको बताए कि आप स्वस्थ कैसे बनेंगे— खुद से पूछिए—क्या मैं अपनी आदतें बदलना चाहता हूँ…या सिर्फ एक नया product खरीदना चाहता हूँ? डॉ. नेहा गुप्ताAdv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (2023)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026)

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आज पेड़ कट रहे हैं…कल शायद पानी खरीदने की बारी आपकी होगी।

इंदौर में पानी की कमी सिर्फ मौसम की गलती नहीं है…यह कहीं न कहीं हमारी चुप्पी, दिखावे वाले कदम और गलत प्राथमिकताओं का परिणाम भी है। बड़े-बड़े पेड़ काट दिए जाते हैं…और बदले में छोटी झाड़ियाँ या औपचारिक पौधे लगाकर मान लिया जाता है कि प्रकृति को replace कर दिया गया। लेकिन एक सवाल —क्या 20–30 साल पुराने पेड़ की जगह 2 फुट का पौधा सच में ले सकता है? आज इंदौर पानी की समस्या झेल रहा है।जल स्तर गिर रहा है। गर्मी बढ़ रही है।और अगर अभी भी ज़मीन पर मजबूत कदम नहीं उठे, तो आने वाले सालों में पानी सिर्फ जरूरत नहीं… संघर्ष बन सकता है। आज इंदौर की सबसे बड़ी विडंबना है कि..जिस शहर को हमने “साफ़” बनाने पर गर्व किया…क्या हम उसे “प्यासा” होते देखने की तैयारी कर रहे हैं? यह सिर्फ Government bodies की जिम्मेदारी नहीं —यह हम सबकी collective responsibility है। 🌳 एक पेड़ लगाइए।🌳 उसकी जिम्मेदारी लीजिए।🌳 पेड़ बचाइए, क्योंकि पानी की लड़ाई टैंकर से नहीं… जड़ों से जीती जाती है। याद रखिए —जब आख़िरी बड़ा पेड़ कटेगा…तब शायद समझ आएगा कि असली luxury पानी था।

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आप मोटे इसलिए नहीं हैं कि आप ज़्यादा खाते हैं…आप मोटे इसलिए हैं क्योंकि आप सही तरीके से नहीं खाते।

एक बार रुककर सोचिए…👉 क्या आपने कभी पेट भरने के बाद भी खाना खाया है? 👉 क्या stress में आपने junk food या पैकेट फूड को solution बना लिया है? अगर हाँ… तो weight नहीं, habit बढ़ रही है। ⚠️ कड़वा सच (जो कोई नहीं बताता) आज हर 5 में से 1 इंसान मोटापे का शिकार है…लेकिन दुख की बात ये नहीं है 😶👉 दुख की बात ये है किलोग solution ढूंढ रहे हैं गलत जगह पर।🥗 कोई diet छोड़ देता है 🥗कोई खुद को भूखा रखता है 🏋️कोई gym join करके 10 दिन बाद हार मान लेता है👉 और फिर बोलते हैं — “मेरे बस की बात नहीं” या मेरे पास समय नही है अभी। 📊 Latest Studies क्या कहती है? 💎Crash dieting = Body “survival mode” में चली जाती है 💎Packet food = धीरे-धीरे fat storage बढ़ाता है 💎Sugar = brain को addict करता है👉 इसलिए आप बार-बार वही गलती repeat करते हैं 🍟 Fast Food की असली सच्चाई (जो ads नहीं बताएंगे)ये आपको सिर्फ मोटा नहीं बना रहा…👉 ये आपको dependent बना रहा हैजितना खाते हो, उतनी craving बढ़ती है Body को nutrients नहीं, सिर्फ taste मिलता हैअंदर से body weak… बाहर से fat 👉 इसलिए आप confuse रहते हो:“मैं कम खा रहा हूँ फिर भी weight क्यों नहीं घट रहा?” 💡 सबसे बड़ी गलती जो आप रोज़ कर रहे हैं 🚫 Healthy रहना = खुद को रोकना ❌ 👉 Result?💎 5 दिन control 💎 6th दिन binge eating फिर guilt… फिर वही cycle ✔️ असली solution क्या है?Healthy रहना = समझदारी से enjoy करना अगली बार खाना खाओ तो ये मत सोचो: ❌ “इसमें कितनी calories हैं?” ✔️ ये सोचो: 💎 इसका स्वाद कैसा है? 💎इसमें nutrients क्या हैं? 💎क्या ये मुझे satisfy करेगा? 👉 क्योंकि body को सिर्फ खाना नहीं…संतुष्टि चाहिए होती है। ❤️ 👉 अगर वजन कम करना है तो…खाने से मत भागो, उससे रिश्ता सुधारो।हर bite को महसूस करोधीरे खाओबिना mobile के खाओ 👉 जब mind संतुष्ट होता है,तो junk food की craving खुद खत्म हो जाती है 🥗 Simple रखोगे तो ही टिकेगा Complicated diet = 10 दिनSimple diet = lifetime👉 इसलिए ऐसा खाना चुनोजो आप रोज़ खा सको… बिना stress के 🚀 👉 “आपका वजन आपकी body की गलती नहीं…आपकी daily आदतों का result है।” 🔥 👉 “जब आप खाने को control करना छोड़ देते हैं,तब आपका शरीर खुद control में आ जाता है।” “मेरा उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना नहीं बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव रखना है। आपकी सेहत और खुशहाली ही मेरी वास्तविक उपलब्धि है।” डॉ. नेहा गुप्ता Adv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (२0२3)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026) विशेष फीचरः ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (फरवरी 2026 संस्करण) – कवर पेज और विशेष लेख।MBA (APR) www.drnehagupta.uk 💬अगर आप सच में change चाहते हैं…तो आज से शुरुआत कीजिए : “START TODAY” और ये ब्लॉग उस व्यक्ति को भेजिए…जो हर Monday से diet शुरू करता है 😄

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