Author name: neha13.nutritionist@gmail.com

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DETOX नहीं… हमने अपने शरीर पर भरोसा खो दिया है।

एक समय था जब लोग सेहत को आदतों से जोड़ते थे।आज धीरे-धीरे सेहत को पैकेट, पाउडर और प्रोग्राम से जोड़ दिया गया है। सुबह उठते ही डर शुरू—🌤️“Body toxic हो गई है…”“Detox नहीं किया तो नुकसान होगा…”“Special cleansing की जरूरत है…” 🌬️ और यहीं से शुरू होता है एक ऐसा बाजार— जहाँ कई बार पहले असुरक्षा पैदा होती है, फिर उसका समाधान बेचा जाता है।धीरे-धीरे हमने अपने शरीर को समझना कम कर दिया और बाहरी दावों पर ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया। थोड़ी थकान हुई — Detox त्योहार में ज्यादा खा लिया — Detox कुछ दिन routine खराब रहा — Detox लेकिन शायद सवाल Detox का नहीं, विश्वास का है।हम उस शरीर पर शक करने लगे हैं जो जन्म से लेकर आज तक हर दिन बिना शोर किए काम कर रहा है। हाँ, शरीर को सहयोग चाहिए—अच्छा भोजन।🥗पर्याप्त पानी।🥛नींद।😴गतिविधि।🏃🚴संतुलन। 🏂 लेकिन हर असुविधा का समाधान किसी bottle या packet में नहीं होता। कई बार हम हजारों रुपये 💵 खर्च करके वही तलाश रहे होते हैं जिसकी शुरुआत हमारी थाली, रसोई और दिनचर्या से हो सकती है। सबसे बड़ी गलती यह नहीं कि लोग products 🛍️खरीद रहे हैं।सबसे बड़ी गलती तब होती है जब लोग अपनी सेहत की जिम्मेदारी पूरी तरह बाहर (Market) सौंप देते हैं। याद रखिए—🥗 सेहत कोई 7 दिन का challenge नहीं। 🪄 कोई जादुई shortcut नहीं। 💎 सेहत रोज़ लिए गए छोटे फैसलों का परिणाम है। 🐦‍🔥 अपने शरीर को दुश्मन मत समझिए। उसे सुनिए।उसे समय दीजिए। और उससे पहले कि कोई market आपको बताए कि आप स्वस्थ कैसे बनेंगे— खुद से पूछिए—क्या मैं अपनी आदतें बदलना चाहता हूँ…या सिर्फ एक नया product खरीदना चाहता हूँ? डॉ. नेहा गुप्ताAdv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (2023)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026)

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आज पेड़ कट रहे हैं…कल शायद पानी खरीदने की बारी आपकी होगी।

इंदौर में पानी की कमी सिर्फ मौसम की गलती नहीं है…यह कहीं न कहीं हमारी चुप्पी, दिखावे वाले कदम और गलत प्राथमिकताओं का परिणाम भी है। बड़े-बड़े पेड़ काट दिए जाते हैं…और बदले में छोटी झाड़ियाँ या औपचारिक पौधे लगाकर मान लिया जाता है कि प्रकृति को replace कर दिया गया। लेकिन एक सवाल —क्या 20–30 साल पुराने पेड़ की जगह 2 फुट का पौधा सच में ले सकता है? आज इंदौर पानी की समस्या झेल रहा है।जल स्तर गिर रहा है। गर्मी बढ़ रही है।और अगर अभी भी ज़मीन पर मजबूत कदम नहीं उठे, तो आने वाले सालों में पानी सिर्फ जरूरत नहीं… संघर्ष बन सकता है। आज इंदौर की सबसे बड़ी विडंबना है कि..जिस शहर को हमने “साफ़” बनाने पर गर्व किया…क्या हम उसे “प्यासा” होते देखने की तैयारी कर रहे हैं? यह सिर्फ Government bodies की जिम्मेदारी नहीं —यह हम सबकी collective responsibility है। 🌳 एक पेड़ लगाइए।🌳 उसकी जिम्मेदारी लीजिए।🌳 पेड़ बचाइए, क्योंकि पानी की लड़ाई टैंकर से नहीं… जड़ों से जीती जाती है। याद रखिए —जब आख़िरी बड़ा पेड़ कटेगा…तब शायद समझ आएगा कि असली luxury पानी था।

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आप मोटे इसलिए नहीं हैं कि आप ज़्यादा खाते हैं…आप मोटे इसलिए हैं क्योंकि आप सही तरीके से नहीं खाते।

एक बार रुककर सोचिए…👉 क्या आपने कभी पेट भरने के बाद भी खाना खाया है? 👉 क्या stress में आपने junk food या पैकेट फूड को solution बना लिया है? अगर हाँ… तो weight नहीं, habit बढ़ रही है। ⚠️ कड़वा सच (जो कोई नहीं बताता) आज हर 5 में से 1 इंसान मोटापे का शिकार है…लेकिन दुख की बात ये नहीं है 😶👉 दुख की बात ये है किलोग solution ढूंढ रहे हैं गलत जगह पर।🥗 कोई diet छोड़ देता है 🥗कोई खुद को भूखा रखता है 🏋️कोई gym join करके 10 दिन बाद हार मान लेता है👉 और फिर बोलते हैं — “मेरे बस की बात नहीं” या मेरे पास समय नही है अभी। 📊 Latest Studies क्या कहती है? 💎Crash dieting = Body “survival mode” में चली जाती है 💎Packet food = धीरे-धीरे fat storage बढ़ाता है 💎Sugar = brain को addict करता है👉 इसलिए आप बार-बार वही गलती repeat करते हैं 🍟 Fast Food की असली सच्चाई (जो ads नहीं बताएंगे)ये आपको सिर्फ मोटा नहीं बना रहा…👉 ये आपको dependent बना रहा हैजितना खाते हो, उतनी craving बढ़ती है Body को nutrients नहीं, सिर्फ taste मिलता हैअंदर से body weak… बाहर से fat 👉 इसलिए आप confuse रहते हो:“मैं कम खा रहा हूँ फिर भी weight क्यों नहीं घट रहा?” 💡 सबसे बड़ी गलती जो आप रोज़ कर रहे हैं 🚫 Healthy रहना = खुद को रोकना ❌ 👉 Result?💎 5 दिन control 💎 6th दिन binge eating फिर guilt… फिर वही cycle ✔️ असली solution क्या है?Healthy रहना = समझदारी से enjoy करना अगली बार खाना खाओ तो ये मत सोचो: ❌ “इसमें कितनी calories हैं?” ✔️ ये सोचो: 💎 इसका स्वाद कैसा है? 💎इसमें nutrients क्या हैं? 💎क्या ये मुझे satisfy करेगा? 👉 क्योंकि body को सिर्फ खाना नहीं…संतुष्टि चाहिए होती है। ❤️ 👉 अगर वजन कम करना है तो…खाने से मत भागो, उससे रिश्ता सुधारो।हर bite को महसूस करोधीरे खाओबिना mobile के खाओ 👉 जब mind संतुष्ट होता है,तो junk food की craving खुद खत्म हो जाती है 🥗 Simple रखोगे तो ही टिकेगा Complicated diet = 10 दिनSimple diet = lifetime👉 इसलिए ऐसा खाना चुनोजो आप रोज़ खा सको… बिना stress के 🚀 👉 “आपका वजन आपकी body की गलती नहीं…आपकी daily आदतों का result है।” 🔥 👉 “जब आप खाने को control करना छोड़ देते हैं,तब आपका शरीर खुद control में आ जाता है।” “मेरा उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना नहीं बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव रखना है। आपकी सेहत और खुशहाली ही मेरी वास्तविक उपलब्धि है।” डॉ. नेहा गुप्ता Adv. Nutritionist (London) | Hon. PhD (Washington)London Book of World Records Holder (२0२3)Super Doctor Award (2025) | Women of Impact Award (2026) विशेष फीचरः ‘वाशिंगटन पोस्ट’ (फरवरी 2026 संस्करण) – कवर पेज और विशेष लेख।MBA (APR) www.drnehagupta.uk 💬अगर आप सच में change चाहते हैं…तो आज से शुरुआत कीजिए : “START TODAY” और ये ब्लॉग उस व्यक्ति को भेजिए…जो हर Monday से diet शुरू करता है 😄

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GLP-1: एक ‘वरदान’ या सिर्फ एक ‘शॉर्टकट’ ?

​GLP-1: एक ‘वरदान’ या सिर्फ एक ‘शॉर्टकट’ ?​मोटापा कोई व्यक्तिगत विफलता नहीं है, बल्कि एक गंभीर बीमारी है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन्स का असंतुलन है जो दिल की बीमारी, डायबिटीज और यहाँ तक कि कैंसर जैसे रोगों को न्योता देता है।​हालिया स्टडीज (2025-26) बताती हैं कि GLP-1 इंजेक्शंस शरीर के प्राकृतिक हार्मोन की नकल करते हैं, जिससे भूख कम लगती है और आप जल्दी पेट भरा हुआ महसूस करते हैं। लेकिन क्या यह काफी है?​​अगर आप GLP-1 को केवल वजन घटाने की मशीन समझ रहे हैं और अपनी जीवनशैली (Lifestyle) में बदलाव नहीं कर रहे, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं: ​डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, थायराइड फंक्शन और किडनी की जांच के बाद ही इसकी सही खुराक तय करते हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के इसके उपयोग से पैन्क्रियाटाइटिस या गंभीर गैस्ट्रिक समस्याएं हो सकती हैं।​​याद रखें, दवा (GLP-1) + सही आहार + शारीरिक गतिविधि = स्थायी स्वास्थ्य।​यह इंजेक्शन आपकी मंजिल नहीं, बल्कि मंजिल तक पहुँचने का एक जरिया है। अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें। आज ही अपने डॉक्टर से मिलें और एक संतुलित योजना बनाएं। — Dr Neha Gupta

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क्या आप अपनी सबसे कीमती संपत्ति की नीलामी कर रहे हैं?

क्या आप अपनी सबसे कीमती संपत्ति की नीलामी कर रहे हैं?​हम अपनी गाड़ियों की सर्विसिंग समय पर कराते हैं, मोबाइल पर स्क्रीन गार्ड लगवाते हैं, लेकिन उस ‘घर’ का क्या जिसमें हम चौबीसों घंटे रहते हैं? जी हाँ, आपका शरीर।​सच्चाई यह है कि हमारी बॉडी मूवमेंट के लिए बनी है। लेकिन आज की लाइफस्टाइल ने हमें कुर्सियों और सोफों का गुलाम बना दिया है। घंटों एक जगह बैठना, ऊपर से पैकेट बंद खाना और फास्ट फूड—यह कॉम्बिनेशन बीमारियों के लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछाने जैसा है।​क्यों ज़रूरी है वर्कआउट? ​ICMR (Indian Council of Medical Research) और WHO के आंकड़े डराने वाले हैं। भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ जैसे टाइप-2 डायबिटीज और हाइपरटेंशन महामारी की तरह फैल रही हैं।​ WHO के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता (Inactivity) दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।​प्रतिदिन 10,000 कदम चलना सिर्फ एक नंबर नहीं है; यह आपके दिल को मजबूत रखने, कैलोरी बर्न करने और मानसिक तनाव को कम करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।​दर्द और सर्जरी: रुकावट या बहाना? ​अक्सर लोग कहते हैं, “मुझे बैक पेन है, सर्वाइकल है, या घुटनों में दर्द है, मैं कैसे वर्कआउट करूँ?” या फिर “मेरी तो सर्जरी हुई है।”सुनिए, अगर आप बीमार हैं, तो एक्सरसाइज आपके लिए ‘विकल्प’ नहीं, बल्कि ‘इलाज’ है।​बैक पेन और सर्वाइकल: सही पोश्चर और स्ट्रेचिंग से इन्हें जड़ से खत्म किया जा सकता है। ​डायबिटीज और बीपी: वर्कआउट से इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।​सर्जरी के बाद: डॉक्टर की सलाह और एक प्रोफेशनल कोच की देखरेख में ‘मेडिकल जिमिंग’ या ‘रिहैब एक्सरसाइज’ करना न केवल संभव है, बल्कि जल्दी रिकवरी के लिए अनिवार्य है।​याद रखिए: अगर आज आप अपनी सेहत के लिए फैसला नहीं ले रहे हैं, तो कल कोई डॉक्टर या हॉस्पिटल आपकी लाइफस्टाइल का फैसला ले रहा होगा।​बहाने या परिणाम? चुनाव आपका है​“समय नहीं है”—यह इस सदी का सबसे बड़ा झूठ है। हमारे पास सोशल मीडिया के लिए समय है, नेटफ्लिक्स के लिए समय है, लेकिन उस शरीर के लिए 30 मिनट नहीं हैं जो हमें पूरी दुनिया घुमाता है?​सिर्फ जानना काफी नहीं है (Implementation is Key):हर मोटे व्यक्ति को पता है कि वजन कैसे कम होता है। हर बीमार को पता है कि परहेज क्या है। लेकिन सिर्फ ज्ञान से वजन कम नहीं होता, पसीना बहाने से होता है। ज्ञान और क्रिया (Execution) के बीच का जो फासला है, वही आपकी बीमारी और सेहत के बीच का फासला है।​आपकी बॉडी एक मंदिर है, कूड़ादान नहीं​आपको जो यह शरीर मिला है, यह अनमोल है। इसकी कदर करें। अगर आप एक दर्द मुक्त (Pain-free) और सक्रिय जीवन जीना चाहते हैं, तो बिस्तर छोड़िए और पसीना बहाइए। ​आज का दर्द कल की ताकत बनेगा। फिट रहें, स्वस्थ रहें और अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनें। कल की किसी और के हाथ की दवाइयों से बेहतर है आज की अपनी मेहनत।​क्या आप आज से अपने 10,000 कदम पूरे करने का संकल्प लेते हैं? — Dr Neha Gupta

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​स्वाद की मिठास या बीमारियों का जाल? क्या आपकी थाली आपको बीमार कर रही है ?

​स्वाद की मिठास या बीमारियों का जाल? क्या आपकी थाली आपको बीमार कर रही है ? ​हम सभी अपने बच्चों को दुनिया की हर खुशी देना चाहते हैं। उनके जन्मदिन पर बड़ा सा केक, स्कूल से आने पर चिप्स के पैकेट और थकावट होने पर ‘2 मिनट’ में बनने वाले नूडल्स। हमें लगता है हम प्यार लुटा रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनजाने में हम उनकी थाली में ‘धीमा जहर’ परोस रहे हैं?​हाल ही में अमेरिका से आई नई डाइट गाइडलइन्स ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि हम भारतीयों के लिए एक खतरे की घंटी है। ​अब बात करते है उस डरावने सच की – ​अमेरिका, जिसे हम अक्सर लाइफस्टाइल के मामले में फॉलो करते हैं, आज खुद एक गंभीर संकट में है। वहां की नई रिपोर्ट्स बताती हैं: ​90% स्वास्थ्य खर्च ऐसी बीमारियों पर हो रहा है जो खराब खान-पान से उपजी हैं।​75% वयस्क और 33% बच्चे मोटापे की चपेट में हैं। ​हैरानी की बात यह है कि वहां अब अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (जैसे फ्रोजन मील, सोडा, पैकेज्ड स्नैक्स) को कम करने की सख्त सलाह दी जा रही है। ​भारत में बढ़ता ‘पैकेट कल्चर’​हम भारतीय अब ताजी सब्जियों से ज्यादा सुपरमार्केट की ‘चमकदार पैकिंग’ पर भरोसा करने लगे हैं। भारत में आज 29% लोग मोटापे और 13% लोग डायबिटीज के शिकार हैं। ​हम क्यों इसे ज्यादा अपना रहे हैं? ​समय की कमी: भागदौड़ भरी जिंदगी में ‘रेडी टू ईट’ आसान लगता है। ​विज्ञापन का मायाजाल: टीवी पर दिखने वाले लुभावने विज्ञापन हमें विश्वास दिलाते हैं कि ये ‘हेल्थी’ हैं। ​दिखावा: आजकल बाहर का खाना या पैकेज्ड फूड स्टेटस सिंबल बन गया है। ​क्या आपके खाने में ‘भोजन’ है या सिर्फ ‘केमिकल’? ​प्रोसेस्ड फूड में तीन ऐसी चीजें होती हैं जो आपके शरीर के अंगों को धीरे-धीरे खत्म करती हैं: ​अत्यधिक सोडियम (नमक): जो हाई बीपी और किडनी की समस्या देता है। ​छिपी हुई शुगर: जो मोटापे और कैंसर जैसी बीमारियों की जड़ है। ​प्रिजर्वेटिव्स: वो रसायन जो खाने को हफ्तों तक खराब नहीं होने देते, लेकिन आपके मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देते हैं। ​आज ही बदलें अपनी दिनचर्या: छोटे कदम, बड़ी जीत ​हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। स्वास्थ्य कोई मंजिल नहीं, यह एक यात्रा है जो आपकी रसोई से शुरू होती है। ​’रसोई की ओर वापसी’ (Back to Roots): पैकेट खोलने के बजाय फल काटें। पैकेट वाले जूस की जगह नींबू पानी या नारियल पानी पिएं। ​5-सामग्री वाला नियम: अगर किसी पैकेट के पीछे सामग्री (Ingredients) की लिस्ट में 5 से ज्यादा नाम हैं या ऐसे नाम हैं जिन्हें आप पढ़ भी नहीं पा रहे, तो उसे वहीं छोड़ दें। ​रविवार का ‘Meal Prep’: समय बचाने के लिए हफ्ते के अंत में घर की चटनी, कटी हुई सब्जियां तैयार रखें ताकि ऑफिस की भूख में आप बिस्किट या भुजिया न खाएं। ​बच्चों के लिए रोल मॉडल बनें: बच्चा वही सीखता है जो आपको करते देखता है। अगर आप फल खाएंगे, तो वो भी खाएगा। फैसला आपका है –​कल्पना कीजिए, आज से 10 साल बाद आप कहां होंगे ? क्या आप अपने बच्चों की शादी या उनकी सफलता का आनंद एक अस्पताल के बिस्तर पर बैठकर लेना चाहते हैं? या आप एक ऊर्जावान दादा-दादी/माता-पिता बनकर उनके साथ पार्क में दौड़ना चाहते हैं ? ​प्रोसेस्ड फूड का पैकेट खोलना आसान है, लेकिन बीमारी का बोझ ढोना बहुत मुश्किल। बाजार की चमक आपकी सेहत से बढ़कर नहीं है।याद रखिए, “आपका शरीर ही वह इकलौती जगह है जहाँ आपको अंत तक रहना है।” आज ही अपने फ्रिज और अपनी सोच को साफ करें।​बदलाव की शुरुआत खुद से करें। स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत! 🇮🇳🍏✨ — Dr Neha GuptaADV. NUTRITIONIST (LONDON)Hon.PhD (Washington)MBA (APR)www.drnehagupta.uk

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ट्रेंड नहीं, समझदारी चुनिए — आपकी सेहत कोई प्रोडक्ट नहीं है”

“ट्रेंड नहीं, समझदारी चुनिए — आपकी सेहत कोई प्रोडक्ट नहीं है” आज भारत में एक नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है —जल्दी शरीर बनाओ, जल्दी परिणाम पाओ। सोशल मीडिया, जिम ट्रेनर और सप्लीमेंट कंपनियों ने एक ऐसी मानसिकता बना दी है कि“अगर आप प्रोटीन शेक नहीं लेते, तो आप फिट नहीं बन सकते।”लेकिन सच क्या है? कई अस्पतालों में अब ऐसे मरीज आने लगे हैं जिनकी उम्र 30–35 साल है और उनकी किडनी की कार्यक्षमता 40–60% तक कम पाई जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण –बिना जरूरत के ज्यादा प्रोटीन सप्लीमेंट लेना याअत्यधिक जिम सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयडबिना डॉक्टर सलाह के हाई-प्रोटीन डाइटधीरे-धीरे यह एक Silent Health Crisis बनती जा रही है। भारत में किडनी रोग के मरीज हर साल तेजी से बढ़ रहे हैं। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में करोड़ों लोग किसी न किसी स्तर की Chronic Kidney Disease (CKD) से प्रभावित हैं, लेकिन बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को बहुत देर से पता चलता है। जिम का शॉर्टकट – सेहत पर भारीआज कई युवाओं की सोच बन गई है –“प्रोटीन ज्यादा = शरीर ज्यादा अच्छा।” जबकि science कहता है –ऐसा बिल्कुल नहीं है।Indian Council of Medical Research के अनुसार एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 0.66–0.83 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन की आवश्यकता होती है। यानी 60 किलो व्यक्ति को लगभग 45–50 ग्राम प्रोटीन ही पर्याप्त है। और यह मात्रा सामान्य भारतीय भोजन से आसानी से मिल जाती है:🔅दाल🔅दूध / दही🔅घर का बना हुआ पनीर🔅चना / मूंग🔅मेवे ( dry fruits)🔅रोटी / अनाज इसीलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि संतुलित भोजन करने वाले लोगों को नियमित प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती। ज्यादा प्रोटीन लेने से क्या हो सकता है?जब शरीर की जरूरत से अधिक प्रोटीन लिया जाता है, तो उसका मेटाबोलिज्म किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक अत्यधिक प्रोटीन लेने से संभावित समस्याएँ: कम हो जाते हैं, जिससे शरीर में अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। सबसे बड़ी समस्या – देर से पता चलना किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग ध्यान नहीं देते।ध्यान देने योग्य संकेत🔅बार-बार पेशाब आना🔅पेशाब में झाग🔅पैरों या चेहरे पर सूजन🔅अत्यधिक थकान🔅भूख कम लगना🔅पीठ के निचले हिस्से में दर्द जब ये लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब तक कई बार किडनी काफी नुकसान झेल चुकी होती है। भारत की वास्तविकताभारत में एक बड़ा विरोधाभास हैएक ओरकई लोग प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं दूसरी ओरकुछ लोग बिना जरूरत के अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट ले रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि 1.6 g/kg से अधिक प्रोटीन लेने से सामान्य लोगों में अतिरिक्त मांसपेशी लाभ नहीं मिलता। अधिक प्रोटीन = अधिक फायदायह एक मार्केटिंग मिथक भी हो सकता है। क्या भारतीयों को प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत है?ज्यादातर मामलों में नहीं। अगर आपकी डाइट में ये चीजें हैं:🔅दाल🔅दूध / दही🔅पनीर (घर पर बनाया हुआ )🔅अंकुरित अनाज🔅मूंगफली / बादाम तो आपको पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है।सप्लीमेंट की जरूरत केवल कुछ परिस्थितियों में हो सकती है:▫️गंभीर कुपोषण▫️पेशेवर एथलीट गंभीर बीमारी से रिकवरीऔर वह भी डॉक्टर या न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह से।स्वास्थ्य के लिए सही रास्ताशरीर बनाने का असली फॉर्मूला बहुत सरल है: ✔ संतुलित भारतीय भोजन✔ नियमित व्यायाम✔ पर्याप्त नींद✔ कम प्रोसेस्ड फूड✔ नियमित हेल्थ चेक-अपकोई भी पाउडर, शेक या कैप्सूल स्वास्थ्य का शॉर्टकट नहीं है।याद रखिए आज का सबसे बड़ा भ्रम है —“Health is a product.”लेकिन सच यह है कि Health is a lifestyle.आपकी सेहत किसी कंपनी का प्रोडक्ट नहीं है।यह आपकी जिम्मेदारी है। ट्रेंड के पीछे मत भागिए।समझदारी के साथ जीना सीखिए। आपकी सेहत अनमोल है।इसे विज्ञापन नहीं, विवेक से बचाइए। आपकी सेहत – आपकी जिम्मेदारी।स्वस्थ रहें, मस्त रहें। 🌿 — Dr Neha Gupta

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“जब धरती जल रही है… तब इंसान AC में छिप रहा है।”

लेकिन एक सवाल है…क्या सिर्फ गर्मी बढ़ी है?या हमारी संवेदनाएँ कम हो गई हैं? आज धूप तेज़ है…तो हम पेड़ ढूंढते हैं। 🌳प्यास लगती है…तो पानी ढूंढते हैं। 💧 लेकिन कभी सोचा? जब डेवलपमेंट के नाम पर पेड़ कट रहे थे…तब हम कहाँ थे?🌳🪵🍂🍃 आज लू (Heatwave) हमें डरा रही है…पर सच यह है—प्रकृति बदला नहीं लेती…बस हिसाब बराबर करती है। याद रखिए— 🌳 पेड़ नहीं → बारिश कम❌ 💦पानी नहीं → खेती खत्म❌ 🏜️खेती नहीं → भोजन खत्म❌🥕🍎भोजन नहीं → जीवन खत्म❌ सच्चाई सिर्फ एक है— “Nature है… तभी Future है।” इस धरती को उपदेश/भाषण नहीं…ज़िम्मेदार लोग चाहिए। इस बारिश में सिर्फ फोटो के लिए पौधा मत लगाइए…एक पौधे की जिम्मेदारी लीजिए।उसे पानी दीजिए… बचाइए…जब तक वह पेड़ न बन जाए। क्योंकि— “पौधे लगाना आसान है…पेड़ बचाना चरित्र दिखाता है।” 🌱 एक कठिन सवाल छोड़ रही हूँ— अगर पेड़, पानी और प्रकृति खत्म हो जाए…तो पैसे खाकर कितने दिन जिंदा रह पाएंगे? सोचिएगा जरूर। अगर आप मानते हैं कि“पेड़ होंगे… तभी जीवन होगा”तो इसे शेयर कीजिए और इस बारिश के मौसम में पेड़ की जिम्मेदारी लीजिए अपने आस पास के लोगों के साथ मिलकर पेड़ लगाए शायद हमारी छोटी सी कोशिश से आने वाले सालों में गर्मी में कुछ फर्क आ जाए। -Dr.Neha Gupta

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क्या आपका पसंदीदा पनीर वाकई ‘सेहत’ है या ‘सफेद जहर’? जानिए कड़वा सच!

क्या आपका पसंदीदा पनीर वाकई ‘सेहत’ है या ‘सफेद जहर’? जानिए कड़वा सच!​​”कल्पना कीजिए, आप अपने बच्चे को बड़े प्यार से पनीर टिक्का खिला रहे हैं, यह सोचकर कि उसे भरपूर प्रोटीन मिल रहा है। लेकिन क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि वह पनीर दूध से नहीं, बल्कि पाम ऑयल, डिटर्जेंट और यूरिया से बना हो सकता है? जिसे आप ‘शक्ति’ समझ रहे हैं, क्या वो आपके परिवार की सेहत के लिए ‘धीमा जहर’ तो नहीं?”​​हमारा दिमाग ‘सफेद’ और ‘नरम’ चीजों को शुद्धता और ताजगी से जोड़कर देखता है। इसी मनोवैज्ञानिक झुकाव का फायदा मिलावटखोर उठाते हैं। हम सस्ता और होटल जैसा ‘रबड़ जैसा’ सफेद पनीर ढूंढते हैं, जबकि असली पनीर का रंग हल्का मटमैला (off-white) और बनावट दानेदार होती है।​​बाजार में आज तीन तरह के पनीर बिक रहे हैं: ​पनीर तभी तक पौष्टिक है जब तक वह असली है। आपकी एक छोटी सी जागरूकता आपके परिवार को बड़ी बीमारियों से बचा सकती है। याद रखें, आपकी थाली का चुनाव ही आपके स्वास्थ्य का भविष्य तय करता है।​Choose quality. Choose safety. Choose to Eat Right. Dr.Neha GuptaAdv.Nutritionist( London)Hon.PhD (Washington)MBA (APR)www.drnehagupta.uk

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अब अपने लिए जीना शुरू कीजिए…

“अब अपने लिए जीना शुरू कीजिए…” 50–60 वर्ष की उम्र—रुकने की नहीं, समझदारी से आगे बढ़ने की उम्र है। जब हम 20–30 के होते हैं, तो शरीर हमारी हर गलती को माफ कर देता है…लेकिन 50 के बाद, शरीर हिसाब मांगता है। आपकी body आपकी Chartered Accountant की तरह है— हर देर रात, हर मीठा, हर लापरवाही… सब रिकॉर्ड होता है। और फिर एक दिन रिपोर्ट आती है—Diabetes, Heart issues, Joint pain, Weight gain… 👉 सवाल है—क्या अब भी समय है बदलने का?हाँ, आज से… अभी से। आपने जिंदगी भर सबका ख्याल रखा—बच्चों का, परिवार का, जिम्मेदारियों का…लेकिन अब एक सवाल खुद से पूछिए—“मैंने आखिरी बार अपने लिए क्या किया?”अगर जवाब “कुछ नहीं” है…तो यहीं से शुरुआत कीजिए। ⚠️ सबसे बड़ी गलती जो लोग आज कर रहे है : 🔅“अब उम्र हो गई है, क्या ही बदलेंगे…” ❌ 🔅“घर का काम ही काफी है, अलग से exercise की जरूरत नहीं…” ❌ 🔅“WhatsApp और reels में जो बताया वही कर लेंगे…” ❌ घर का काम physical activity नहीं है (especially महिलाओं के लिए)शरीर को structured movement चाहिए—walking, stretching, strength training… बिना डॉक्टर की सलाह के experiments करना खतरनाक हो सकता है Latest studies कहती हैं भारत में 50+ उम्र के लोगों मेंLifestyle diseases तेजी से बढ़ रहे हैं । 🔅रोज़ 40 मिनट की physical activity करने से 💞 Heart disease का risk 25–30% तक कम हो सकता है 🔅 Diabetes control बेहतर होता है 🔅Active seniors की mental health और memory ज्यादा बेहतर रहती है 🚶‍♂️ Physical Activity क्यों जरूरी है?क्योंकि… 🔅यह सिर्फ weight नहीं घटाती, जीवन बढ़ाती है 🔅joints को lubricate करती है 🔅heart को मजबूत बनाती है 🔅insulin sensitivity improve करती है 👉 याद रखिए:“Movement ही medicine है…” 🕰️ Senior Citizen के लिए Simple Daily Routine 🔅10–15 मिनट deep breathing / प्राणायाम 🔅40–60 मिनट walking/10000कदम रोज चले । 🔅 stretching करे। 🔅2–3 लीटर पानी जरूर पिएं शाम 6 बजे के पहले। 🔅हर 3–4 घंटे में हल्का और balanced भोजन 🔅processed food/पैकेट में आने वाली चीजों से दूरी औरexcess sugar से दूरी 🔅 strength training करे। 🔅screen time कम करें 🔅7–8 घंटे की नींद 💔 Heart, Diabetes & Weight को कैसे संभालें? 💞Heart के लिए: 🔅रोज़ walking + salt control + stress कम करें Diabetes के लिए: 🔅refined sugar कम 🔅fiber-rich diet ले। 🔅 घर का बना भोजन करे । Weight के लिए: 🔅crash diet नहीं 🔅consistency जरूरी है 👉 Shortcut नहीं, Smart routine अपनाइए। 👩‍🦳 महिलाओं के लिए खास संदेश 🔅आप “superwoman” हैं… लेकिन machine नहीं। 🔅घर का काम exercise नहीं है 🔅रोज़ कम से कम 40 मिनट अपने लिए निकालिए 🔅नई चीज़ सीखिए—dance, socially active, meditation, hobby 👉 क्योंकि…जब आप खुश और fit होंगी, तभी परिवार खुश रहेगा। 🧘‍♂️ कुछ नया सीखना क्यों जरूरी है? 🔅brain active रहता है 🔅depression और loneliness कम होता है 🔅जीवन में purpose आता है 👉 याद रखिए:“जो सीखना बंद करता है, वो जीना बंद करता है…” 🚫 आजकल हर कोई “health expert” बन चुका है…लेकिन आपका शरीर कोई experiment lab नहीं है। 👉 कोई भी नई diet, exercise या supplement शुरू करने से पहले Doctor की सलाह जरूर लें। आपकी सेहत कोई product नहीं है…जिसे market से खरीदा या shortcut से पाया जा सके। यह एक रिश्ता है—आप और आपके शरीर के बीच। 👉 अगर आप आज अपने शरीर का ख्याल रखेंगे,तो कल आपका शरीर आपका साथ देगा। ❤️ आज से एक वादा कीजिए… 🔅मैं रोज़ अपने लिए 40 मिनट निकालूंगा/निकालूंगी 🔅मैं अपने शरीर की सुनूंगा/सुनूंगी 🔅मैं लापरवाही नहीं, जिम्मेदारी चुनूंगा/चुनूंगी ✨ क्योंकि… आपकी सेहत अनमोल है।और आप उससे भी ज्यादा। — Dr Neha Gupta

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