“जब धरती जल रही है… तब इंसान AC में छिप रहा है।”

लेकिन एक सवाल है…क्या सिर्फ गर्मी बढ़ी है?या हमारी संवेदनाएँ कम हो गई हैं?

आज धूप तेज़ है…तो हम पेड़ ढूंढते हैं। 🌳प्यास लगती है…तो पानी ढूंढते हैं। 💧

लेकिन कभी सोचा?

जब डेवलपमेंट के नाम पर पेड़ कट रहे थे…तब हम कहाँ थे?🌳🪵🍂🍃

आज लू (Heatwave) हमें डरा रही है…पर सच यह है—प्रकृति बदला नहीं लेती…बस हिसाब बराबर करती है।

याद रखिए—

🌳 पेड़ नहीं → बारिश कम❌ 💦पानी नहीं → खेती खत्म❌ 🏜️खेती नहीं → भोजन खत्म❌
🥕🍎भोजन नहीं → जीवन खत्म❌

सच्चाई सिर्फ एक है—

“Nature है… तभी Future है।”

इस धरती को उपदेश/भाषण नहीं…ज़िम्मेदार लोग चाहिए।

इस बारिश में सिर्फ फोटो के लिए पौधा मत लगाइए…एक पौधे की जिम्मेदारी लीजिए।उसे पानी दीजिए… बचाइए…जब तक वह पेड़ न बन जाए।

क्योंकि—

“पौधे लगाना आसान है…पेड़ बचाना चरित्र दिखाता है।” 🌱

एक कठिन सवाल छोड़ रही हूँ—

अगर पेड़, पानी और प्रकृति खत्म हो जाए…तो पैसे खाकर कितने दिन जिंदा रह पाएंगे?

सोचिएगा जरूर।

अगर आप मानते हैं कि“पेड़ होंगे… तभी जीवन होगा”तो इसे शेयर कीजिए और इस बारिश के मौसम में पेड़ की जिम्मेदारी लीजिए अपने आस पास के लोगों के साथ मिलकर पेड़ लगाए शायद हमारी छोटी सी कोशिश से आने वाले सालों में गर्मी में कुछ फर्क आ जाए।

-Dr.Neha Gupta

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