इंदौर में पानी की कमी सिर्फ मौसम की गलती नहीं है…
यह कहीं न कहीं हमारी चुप्पी, दिखावे वाले कदम और गलत प्राथमिकताओं का परिणाम भी है।
बड़े-बड़े पेड़ काट दिए जाते हैं…
और बदले में छोटी झाड़ियाँ या औपचारिक पौधे लगाकर मान लिया जाता है कि प्रकृति को replace कर दिया गया।
लेकिन एक सवाल —
क्या 20–30 साल पुराने पेड़ की जगह 2 फुट का पौधा सच में ले सकता है?
आज इंदौर पानी की समस्या झेल रहा है।
जल स्तर गिर रहा है। गर्मी बढ़ रही है।
और अगर अभी भी ज़मीन पर मजबूत कदम नहीं उठे, तो आने वाले सालों में पानी सिर्फ जरूरत नहीं… संघर्ष बन सकता है।
आज इंदौर की सबसे बड़ी विडंबना है कि..
जिस शहर को हमने “साफ़” बनाने पर गर्व किया…
क्या हम उसे “प्यासा” होते देखने की तैयारी कर रहे हैं?
यह सिर्फ Government bodies की जिम्मेदारी नहीं —
यह हम सबकी collective responsibility है।
🌳 एक पेड़ लगाइए।
🌳 उसकी जिम्मेदारी लीजिए।
🌳 पेड़ बचाइए, क्योंकि पानी की लड़ाई टैंकर से नहीं… जड़ों से जीती जाती है।
याद रखिए —
जब आख़िरी बड़ा पेड़ कटेगा…
तब शायद समझ आएगा कि असली luxury पानी था।
- Dr Neha Gupta