ओट्स (Oats) या जौ-बाजरा? क्या हम विदेशी मार्केटिंग के जाल में फंस रहे हैं ?

​आजकल हर दूसरे व्यक्ति के नाश्ते की मेज पर ‘ओट्स’ या ‘चिया सीड्स’ दिखाई देते हैं। विज्ञापनों ने हमें यह विश्वास दिला दिया है कि यदि स्वस्थ रहना है, तो विदेशी अनाज अपनाना होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो अनाज सात समंदर पार से आ रहा है, क्या वह भारतीय शरीर और जलवायु के लिए वास्तव में सही है?

​हमारे वेदों और आयुर्वेद में ‘देशज’ (स्थानीय) आहार पर बहुत जोर दिया गया है। आयुर्वेद का सिद्धांत है— “यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे”। यानी, आप जिस वातावरण में रहते हैं, वहां उगने वाला अन्न ही आपके शरीर के दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित कर सकता है।

  • ​ओट्स मूल रूप से ठंडे और नम देशों की फसल है। भारतीय शरीर की जठराग्नि (Digestive fire) और यहाँ की गर्म जलवायु के लिए ओट्स अक्सर पचने में भारी और गैस बनाने वाला हो सकता है।
  • ​ वेदों में ‘यव’ (जौ) को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जौ मधुमेह को नियंत्रित करता है और शरीर को शुद्ध करता है। वहीं बाजरा और ज्वार आयरन और कैल्शियम से भरपूर हैं, जो हमारी हड्डियों को भारतीय कठोर जलवायु के अनुसार मजबूती देते हैं।

    ​आजकल लोग वजन घटाने के लिए चिया सीड्स (Chia Seeds) का सहारा लेते हैं। लेकिन भारतीय खिचड़ी के सामने ये सब फीके हैं।
  • ​ जब हम दाल और चावल को मिलाकर खिचड़ी बनाते हैं, तो यह एक ‘कम्प्लीट अमीनो एसिड प्रोफाइल’ तैयार करता है।
  • ​ खिचड़ी दुनिया का सबसे हल्का भोजन है जो आपकी आंतों (Gut health) को आराम देता है।
  • ​चिया सीड्स की जगह तुलसी के बीज (सब्जा) या अलसी का उपयोग करें, जो हमारे शरीर की तासीर के अनुकूल हैं।

    ​प्रोटीन शेक और ओट्स के डिब्बों से कहीं बेहतर हमारे देशी चने और दलिया हैं।
  • ​देशी चना- इसे ‘गरीबों का बादाम’ कहा जाता है। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण के लिए ओट्स से कहीं अधिक प्रभावी हैं।
  • ​दलिया- गेहूं या जौ का दलिया न केवल फाइबर देता है, बल्कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करता है (Low Glycemic Index), जिससे आप लंबे समय तक ऊर्जावान महसूस करते हैं।

    ​ Recent Nutrition Studies से पता चला है कि ‘Bio-individuality’ और ‘Food Miles’ स्वास्थ्य में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
  • ​ हमारे पूर्वज हजारों वर्षों से ज्वार, बाजरा और दालें खाते आए हैं। हमारा DNA इन अनाजों को प्रोसेस करने के लिए बेहतर तरीके से विकसित हुआ है।
  • ​ विदेशी अनाज प्रोसेस्ड होकर और प्रिजर्वेटिव्स के साथ हम तक पहुँचते हैं, जबकि स्थानीय अनाज ताज़ा और पोषक तत्वों से भरपूर होता है।

    ​विदेशी खान-पान बुरा नहीं है, लेकिन वह ‘जरूरी’ भी नहीं है। भारतीय शरीर के लिए बाजरे की रोटी, चने का सत्तू, जौ का दलिया और घी वाली खिचड़ी ही सर्वोत्तम ‘सुपरफूड’ हैं।
    ​याद रखें, स्वस्थ रहने के लिए अपनी संस्कृति और Geography से जुड़ना सबसे पहला कदम है।

— Dr Neha Gupta

  • ADV. NUTRITIONIST (LONDON)
  • Hon.PhD (Washington)
  • MBA (APR)
  • London book of world records – Record holder 2023
  • Super Doctor Awarded 2025
    www.drnehagupta.uk

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top